कोरोनाकाल में लोगों का मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ा


जयपुर। एक ताजा शोध में सामने आया है कि Corona Virus से लड़ते-लड़ते लोग कम ऊर्जावान महसूस करने लगे हैं। लोग आलसी हो गए है। काम में उनका मन नही लगता। नौकरी जाने का डर, खर्चों की चिंता, स्वास्थ्य और परिवार की दूसरी चिंताओं ने लोगों की नींद उड़ा दी है, जिसके चलते उनके मानसिक स्वास्थ्य में बिगाड़ दर्ज किया जा रहा है।

यह शोध गढ़वाल केन्द्रीय विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग की ओर से आयोजित किया गया है, जिसमें Corona महामारी के बीच लोगों के मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण का प्रयास किया गया। शोधकर्ताओं के मुताबिक करीब 37.5 प्रतिशत लोग इस काल में खुद को कम ऊर्जावान महसूस कर रहे हैं। करीब 34.4 प्रतिशत ने क्षति की आशंका जताई है। करीब 33.7 प्रतिशत लोगों ने स्वीकार किया है कि कोरोना महामारी के बीच उनकी एकाग्रता में भारी कमी आई है और 27.7 प्रतिशत ने माना है कि वह मानसिक उलझनों में उलझे रहने लगे हैं। यह सर्वे करीब 587 लोगों पर रैंडम सर्वे के तौर पर किया गया है, जिसके आंकड़े वाकई गंभरीता की ओर इशारा कर रहे हैं। शोध में सामने आया है कि करीब 27.1 प्रतिशत लोगों ने इस दौरान चिड़चिड़ापन महसूरस किया है। करीब 25 प्रतिशत ने खुद को इन सबसे रिकवर करने में असहाय माना है और करीब इतने ही यानी 24.7 प्रतिशत लोगों ने स्वीकार किया है कि चिंताओं के चलते उन्हें नींद नहीं आने की स्मस्याएं भारी मात्रा में उभरने लगी हैं।

सर्वे के परिणामों के अलावा देशभर में अस्पतालों में आपातकाल सेवाओं और स्वास्थ्य को लेकर चिंतित लोगों का पहुंचना जारी है जिसमें से एक बड़ी तादाद ऐसे लोगों की है, जो मानसिक स्वास्थ्य को लेकर ही अस्पताल पहुंच रहे हैं। शोध में 24ङ5 प्रतिशत लोगों ने माना है कि उन्हें नकारात्मक विचार घेरे रखते हैं। 23.7 प्रतिशत ने उदासी, 21.3 प्रतिशत ने हतोत्साहित महसूस करने, 20.4 ने निर्णय क्षमता कम होने, 17.9 प्रतिशत ने व्याकुलता बढऩे और 16.9 प्रतिशत ने आत्मविश्वास में कमी होने की बात भी कही है। अब देखना यह है कि कोरोना महामारी का फिलहाल दूसरा-तीसरा महीना हमारे सामने है और बताया जा रहा है कि अगले तीन-चार महीने काफी भारी हो सकते हैं। ऐसे में मानसिक बीमारियां सामने आने के अलावा लोगों में डिप्रेशन की दर के बढऩे की संभावनाएं भी जताई जा रही हैं।
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