नींद के बारे में यह जाना, तो जीएंगे 10 साल ज्यादा


हमने यह तो सुना है कि पर्याप्त नींद शरीर के लिए बहुत जरूरी है। यह उतनी ही महत्त्पूर्ण है, जितना हमारे जीने के लिए भोजन जरूरी है। लेकिन क्या आपने कभी इस बात पर गौर किया है कि कितना सोना जरूरी है? शायद नहीं किया होगा। हम बाकी बातें करें, उससे पहले सबसे जरूरी बात को जान लेते हैं।




मेडिकल साइंस और नींद के विज्ञान में उम्र के हिसाब से सोना बताया गया है। सबसे पहले हम शुरुआत करते हैं 3 महीने से 12 महीने के बच्चो से। इस उम्र में बच्चे को 4-15 घंटे की नींद दिलानी चाहिए। अगर बच्चा चौदह-पंद्रह घंटे सोता है, या आप उसे सुला पाते हैं, तो उसके शरीर में अंगों का बढऩा, दूध, सैरेलक पचना, मानसिक विकास और शारीरिक मजबूती पर फर्क पड़ता है। कई बार हम छोटे बच्चों को गोद में खिलाते रहते हैं, परिवार में ज्यादा लोग हों, तो एक-दूसरे का लाड करने में नंबर ही नहीं आता, इसके चक्कर में बच्चे की नींद डिस्टर्ब हो जाती है। वह चिड़चिड़ा होने लगता है। इससे उसकी ग्रोथ पर सीधे तौर पर असर पड़ता है।

एक साल से तीन साल के बच्चों में एक्टिविटी, खेलकूद, परिवार में लाड-प्यार बढ़ जाता है। लेकिन नींद के लिहाज से हमें बेहद ध्यान रखना चाहिए कि इस उम्र में बच्चा 12 से चौदह घंटे की नींद जरूर ले। कहीं ऐसा न हो कि वह खेल-खेल में लगा रहे और सोने की बारी आए, तो जब हम रात में सोने जाएं, तभी उसे भी मौका मिले। यह उसके लिए नुकसानदायक होता है। इस उम्र में बच्चे की मैंटल ग्रोथ होती है, अगर नींद में कमी रही, तो बच्चे में कई दूसरी कमियां रह जाती हैं, जिनका एहसास एक समय निकल जाने के बाद ही हमें होता है।

तीन से पांच साल के बच्चे आजकल स्कूल जाने लगते हैं। थोड़े बिजी हो जाते हैं। खिलौने, स्कूल, नए-नए दोस्त, मौज-मस्ती इसमें उनका पूरा दिन निकल जाता है। लेकिन बेहद गंभीरता से हमें उनकी नींद का ध्यान रखना चाहिए क्योंकि इस उम्र में भी बच्चे को 11 से 13 घंटे सुलाना बेहद जरूरी है। अगर वह सोने में आना-कानी करे या खिलौनों में, घर-परिवार में बिजी होने की कोशिश करे, तो भी हमें उसे पकड़ कर सुला ही देना चाहिए। आखिर यह उसकी बैटर हैल्थ के लिए जरूरी है।

6-12 साल के बच्चों को 10-11 घंटे जरूर सुलाना चाहिए। अमूमन इस उम्र में बच्चा कॉलोनी के बच्चों के साथ खेलने, टीवी देखने, साइकिल चलाने जैसी एक्टिविटीज में खुद को व्यस्त कर लेता है। थोड़ा स्कूल का प्रेशर भी शुरू हो जाता है। इसलिए इस उम्र में माता-पिता को ध्यान रखना चाहिए कि बच्चे को कम से कम 10 घंटे की नींद जरूर से दिलवाएं।

12-18 साल की उम्र थोड़ी अलग हो जाती है। बच्चे काफी कुछ समझने लगते हैं। उन्हें कुछ ठीक से समझाएं, तो समझने के अलावा उसकी गंभीरता को जानने समझने लगते हैं। इस उम्र में बच्चों को 8-10 घंटे सोने की व्यवस्था हमें करनी चाहिए। क्योंकि बच्चा स्कूल से थका-हारा आता है, शाम को होमवर्क का प्रेशर, थोड़ा टीवी, परिवार में मस्तियां इन सबमें अमूमन उसकी नींद 10 घंटे नहीं हो पाती है। कोशिश करें, बच्चों को समझाएं, एक शिड्यूल तैयार करवा दें भले, लेकिन उन्हें 10 घंटे की नींद जरूर दिलवाएं।

18 साल से उपर के युवाओं, बुजुर्गों कामकाजी लोगों यानी हम सभी को 6-8 घंटे नींद जरूर लेनी चाहिए। कितना भी काम हो, आप उसे छोड़ दें, लेकिन पहल अपनी आठ घंटे तक की नींद जरूर पूरी करें। कई बार कॉम्पीटीशिन की तैयारी में, तो कभी एग्जाम के प्रेशर में, बॉस के डर से तो कभी ऑफिस में कलीग्स के बीच प्रेशर में आपकी नींद उड़ जाती है। बच्चे बड़े हो रहे होते हैं, तो उनके करियर की चिंता, ब्याह-शादी के तनाव हमें सोने नहीं देते। इससे तनाव घर करने लगता है। लेकिन आप एक बात याद रखना जिंदा रहोगे, स्वस्थ रहोगे, तो यह सब हम कर लेंगे।

इसलिए नींच पर्याप्त लें। कोई ऐसा मौका न चूकें जब आप सोने की राह तलाश कर अपने आठ घंटे पूरे कर सकें। लेकिन अब सोने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना भी हमारे स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद महत्त्वपूर्ण है। आप सोने का एक समय तय जरूर करें। नींद की गोली, एल्कोहल, तंबाकू आदि से बचें। नींद लेने की कोशिश करें। चाय, कॉफी, सॉफ्ट डिं्रक्स अवॉइड करें, यह आपकी नींद की राह में रोड़े अटकाने के अलावा कुछ नहीं करेंगी। एक बात का विशेष तौर पर ध्यान रखें, दिन में सोने से बचें। हालांकि हमारे घरों में फ्री रहने पर हर कोई दिन में घंटे दो घंटे सो लेने की सलाह देता है, लेकिन यह स्वास्थ्य के लिहाज से हानिकारक है।

साथ ही सबसे जरूरी और आज की महत्त्वपूर्ण आखरी बात, आप सोने के लिए अपने बिस्तर को आरामदायक बना कर रखें। शांत वातावरण रखें। कमाने के लिए आप जीवन भर दौडेंगे भागेंगे। कम से कम सोने के लिए थोड़ा खर्च करके सबसे आरामदायक स्थान बनाने का प्रयास करें, ताकि आप सुकून भरी नींद ले सकें। 
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